EPFO का बड़ा बदलाव: ₹25 हजार तक वेतन वालों के लिए बढ़ा PF का दायरा

PF की अनिवार्य कवरेज सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000; 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को EPF, पेंशन और बीमा सुरक्षा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा बड़ा बदलाव अब सैलरी और पेरोल में दिखाई देने वाला है। केंद्र सरकार ने अनिवार्य EPFO कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी है। यह संशोधित सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है।

नई व्यवस्था के तहत वे पात्र कर्मचारी, जो पहले केवल ₹15,000 से अधिक वेतन होने के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर थे और जिनका संबंधित मासिक वेतन ₹25,000 तक है, अब लागू नियमों और पात्रता शर्तों के अधीन EPFO के दायरे में आ सकते हैं। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिल सकता है।

इस बदलाव का फायदा सिर्फ PF बचत तक सीमित नहीं है। पात्र कर्मचारियों को Employees’ Provident Fund (EPF), Employees’ Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance Scheme (EDLI) के तहत मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा।

जिन कर्मचारियों का EPF एवं संबंधित अंशदान पहले ₹15,000 की ceiling तक सीमित था, उनके लिए अंशदान की गणना अब लागू नियमों के तहत *₹25,000 या वास्तविक संबंधित वेतन—जो कम हो—*उस आधार पर हो सकती है। जहां EPS लागू है, वहां अधिकतम EPS योगदान की गणना भी 8.33% की दर से ₹25,000 तक की सीमा पर की जा सकती है।

इसका मतलब कुछ कर्मचारियों के लिए PF में जाने वाली रकम बढ़ सकती है और परिस्थितियों के अनुसार take-home salary पर असर पड़ सकता है। हालांकि हर कर्मचारी की स्थिति समान नहीं होगी—पहले से वास्तविक वेतन पर PF जमा कराने वाले कर्मचारियों और अलग-अलग salary structures में प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए कर्मचारियों को अक्टूबर की salary slip और EPFO passbook में contribution जरूर जांचना चाहिए।

सरकार के मुताबिक, wage ceiling में इससे पहले बदलाव सितंबर 2014 में किया गया था, जब इसे ₹15,000 किया गया था। करीब 12 साल बाद इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया गया है।

 

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