पेट्रोलियम आयात घटाने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर; E20 से E100 तक चलने में सक्षम Flex-Fuel गाड़ियों की तकनीक पर काम
नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद अब वैकल्पिक ईंधन की दिशा में अगला बड़ा फोकस Flex-Fuel और E100 यानी 100 प्रतिशत इथेनॉल तक इस्तेमाल करने में सक्षम इंजन हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ऐसे flex-fuel इंजन विकसित किए जा रहे हैं जो पूरी तरह इथेनॉल पर भी चल सकें और इस तकनीक से लैस वाहन बाजार में लाए जाएंगे।
गडकरी ने मध्य प्रदेश में एक सार्वजनिक बस सेवा के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रम में वैकल्पिक ईंधन और स्वच्छ परिवहन पर जोर देते हुए कहा कि इथेनॉल का बढ़ता इस्तेमाल देश की आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के साथ किसानों के लिए भी आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’ बनाने की बात कही।
गडकरी के अनुसार भारत पेट्रोलियम आयात पर करीब ₹22 लाख करोड़ खर्च करता है। उन्होंने इथेनॉल के अलावा इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ाकर इस निर्भरता को कम करने की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से मक्के की कीमतों में वृद्धि हुई है और इसका लाभ किसानों तक पहुंचा है।
क्या है Flex-Fuel?
Flex-Fuel Vehicle यानी FFV का इंजन अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है। भारत में इस दिशा में व्यावसायिक कदम शुरू हो चुके हैं। जून 2026 में देश की पहली flex-fuel passenger car लॉन्च की गई, जिसकी तकनीक E20 से E100 तक के ethanol-petrol blends के अनुकूल बताई गई है। हालांकि मौजूदा नियामक परिभाषा और homologation में E85 की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
सरकार ने E85 के लिए भी बुनियादी ढांचा बढ़ाना शुरू किया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक E85 की उपलब्धता शुरुआत में 48 सार्वजनिक क्षेत्र की OMC retail outlets पर शुरू की गई और इसे दिसंबर 2026 तक लगभग 500 तथा दिसंबर 2027 तक करीब 5,000 आउटलेट तक बढ़ाने की योजना है।
E100 का मतलब क्या है?
सरल शब्दों में E20 में 20% इथेनॉल होता है, जबकि E100 पूरी तरह या लगभग पूरी तरह ethanol-based fuel को दर्शाता है। लेकिन E100 को सामान्य पेट्रोल वाहन में डालना सही नहीं होगा। वाहन किस ethanol blend के अनुकूल है, यह निर्माता द्वारा निर्धारित किया जाता है। सरकार के पुराने नियम भी E20, E85 और E100 compatibility को वाहन निर्माता द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का प्रावधान करते हैं।
गडकरी ने हाइड्रोजन आधारित परिवहन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह हाइड्रोजन से चलने वाली Toyota Mirai का इस्तेमाल करते हैं और 10 रूटों पर hydrogen buses चलाने की योजना की बात कही। इसके साथ सार्वजनिक परिवहन को सस्ता, सुरक्षित और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को पेट्रोल या E20 को तत्काल समाप्त करने की घोषणा के बजाय भारत की लंबी अवधि की alternative-fuel strategy और flex-fuel ecosystem के विस्तार के रूप में देखना अधिक सटीक होगा। सरकारी स्तर पर E85 infrastructure का विस्तार भी इसी दिशा का हिस्सा है।
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