देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्राथमिक शिक्षकों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर महाआक्रोश रैली निकाली और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि सरकार और शिक्षा मंत्री के साथ कई दौर की वार्ता होने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है।

टीईटी और पुरानी पेंशन सहित कई मांगों पर अड़े शिक्षक
शिक्षक संघ की प्रमुख मांगों में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से संबंधित प्रावधानों को वापस लेना, पुरानी पेंशन योजना बहाल करना और शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्य न कराना शामिल है।
इसके अलावा शिक्षकों ने गोल्डन कार्ड की विसंगतियां दूर करने, हिमालयी राज्यों की तर्ज पर शिक्षा मित्रों को नियमित करने तथा संपूर्ण सेवाकाल में एक बार गृह जनपद में स्थानांतरण का अवसर देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं के कारण उनमें असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद धरातल पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
दिल्ली में 25 लाख शिक्षकों के आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाएगा।
संघ के अनुसार, टीईटी के दायरे में आने वाले देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों को लेकर दिल्ली में बड़े धरना-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के सदस्य दिगंबर सिंह नेगी ने शिक्षकों की समस्याओं और आंदोलन को लेकर अपना पक्ष रखा।
शिक्षकों के इस प्रदर्शन के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन का समाधान निकल पाता है।










