2027 विधानसभा चुनाव से पहले LJP (रामविलास) ने तेज किया संगठन विस्तार; दलित-युवा वोट बैंक पर नजर, गठबंधन पर अभी नहीं खोले पत्ते
लखनऊ, 6 अक्टूबर। बिहार के बाद अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का राजनीतिक आधार बढ़ाने की तैयारी में हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए LJP (रामविलास) ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि पार्टी NDA के साथ चुनाव लड़ेगी या स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
403 सीटों की तैयारी, लेकिन गठबंधन का विकल्प खुला
Jagran की रिपोर्ट के मुताबिक, चिराग पासवान की रणनीति सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं मानी जा रही। यूपी जैसे बड़े राज्य में संगठन का विस्तार कर वह LJP (रामविलास) को बिहार से बाहर मजबूत राजनीतिक पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही व्यापक तैयारी से NDA के भीतर सीटों की हिस्सेदारी को लेकर पार्टी की मोलभाव की स्थिति मजबूत हो सकती है। यह विश्लेषण है; सीट-बंटवारे पर अभी कोई आधिकारिक अंतिम समझौता घोषित नहीं हुआ है।
चिराग ने हाल में साफ किया है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में पार्टी की भूमिका अभी तय नहीं हुई है। राज्य इकाई को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने को कहा गया है और जरूरत पड़ने पर पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार है। उन्होंने नागालैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनकी पार्टी गठबंधन से अलग चुनाव लड़ चुकी है।
दलित और युवा वोटरों पर नजर
Jagran के विश्लेषण में चिराग की यूपी रणनीति के पीछे दलित राजनीति में बन रही नई जगह को भी अहम माना गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का वोट शेयर करीब 9.4% रहा और पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी। ऐसे में LJP (रामविलास) गैर-जाटव दलित समुदायों के साथ युवा मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ‘यूथ बोले’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने में भी सक्रिय है।
बिहार से बाहर विस्तार की कोशिश
2024 के लोकसभा चुनाव में LJP (रामविलास) ने बिहार में अपने हिस्से की सभी 5 सीटें जीती थीं। इसके अलावा नागालैंड विधानसभा में पार्टी के दो विधायक हैं। इन नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश को पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की अगली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
अब 8 अक्टूबर को लखनऊ में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर पार्टी बड़ा कार्यक्रम करने जा रही है। इसमें चिराग पासवान भी मौजूद रहेंगे। Jagran की अलग रिपोर्ट के मुताबिक, इसे 2027 से पहले संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन और NDA में सीटों की हिस्सेदारी के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
NDA के लिए चुनौती या फायदा?
चिराग पासवान की यूपी एंट्री का असर किस गठबंधन को ज्यादा होगा, यह अभी खुला सवाल है। यदि LJP(RV) NDA के साथ उतरती है तो भाजपा को दलित मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने में सहयोग मिल सकता है। वहीं यदि पार्टी अलग चुनाव लड़ती है तो कई सीटों पर वोटों का नया बंटवारा मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण इसके संभावित असर को अलग तरीके से देखते हैं; इसलिए इसे अभी भाजपा के लिए निश्चित नुकसान या फायदा कहना जल्दबाजी होगी।










