BKTC के 300 अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन तेज, नियमितीकरण की मांग को लेकर चारधाम क्षेत्र में क्रमिक अनशन

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों ने समान वेतन और बीमा सुरक्षा की उठाई मांग, समाधान नहीं होने पर पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी

देहरादून/रुद्रप्रयाग, 19 अक्टूबर 2026। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अस्थायी कर्मचारियों ने लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। करीब 300 अस्थायी कर्मचारी नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और यात्रा ड्यूटी के दौरान बीमा सुरक्षा की मांग को लेकर क्रमिक अनशन एवं धरना दे रहे हैं।

कर्मचारियों के अनुसार, 13 अक्टूबर से केदारनाथ धाम, बदरीनाथ धाम, ऊखीमठ और कालीमठ सहित विभिन्न मंदिर परिसरों में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

नियमितीकरण और समान वेतन की प्रमुख मांग

आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से मंदिर समिति में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी नियमित नियुक्ति और सेवा संबंधी मांगों का समाधान नहीं हुआ है।

कर्मचारियों ने वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से नियमितीकरण की मांग उठाई है। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन और यात्रा अवधि में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को सहायता देने की मांग

कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान या सेवाकाल में दिवंगत हुए साथियों के आश्रितों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि मंदिर समिति में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों के भविष्य और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर ठोस निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

तीर्थ पुरोहितों और कांग्रेस का समर्थन मिलने का दावा

कर्मचारियों के आंदोलन को स्थानीय तीर्थ पुरोहितों, पंडा पंचायतों और कांग्रेस का समर्थन मिलने की जानकारी सामने आई है।

आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के सम्मान से भी जुड़ी हैं।

पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर समिति, प्रशासन और सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार का कदम भी उठा सकते हैं। ऐसा होने पर मंदिरों की व्यवस्थाओं और यात्रा संबंधी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल कर्मचारियों की मांगों पर मंदिर समिति और शासन के अगले कदम का इंतजार है।

 

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