RSS सरकार्यवाह ने याद किया अशोक सिंघल का जीवन; राम जन्मभूमि आंदोलन से सामाजिक समरसता तक उनके योगदान को बताया प्रेरणादायी
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख चेहरों में रहे अशोक सिंघल को याद करते हुए उन्हें ‘निष्काम कर्मयोगी’ बताया है। उन्होंने कहा कि सिंघल का जीवन केवल श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक समरसता, संगठन निर्माण और समाज में आत्मविश्वास जगाने जैसे अनेक क्षेत्रों में उनका योगदान रहा।
दत्तात्रेय होसबाले ने अपने लेख में कहा कि अशोक सिंघल ने व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय राष्ट्रकार्य को प्राथमिकता दी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातु विज्ञान में इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करना चुना। बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।
लेख में राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंघल की भूमिका का विशेष उल्लेख किया गया है। राम-जानकी रथयात्रा, शिला पूजन और रामज्योति जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से चले जनजागरण में उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अयोध्या विवाद में 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, 5 अगस्त 2020 को भूमिपूजन हुआ और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई।
होसबाले ने सिंघल के सामाजिक समरसता से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया। लेख में 1989 में राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास के दौरान कामेश्वर चौपाल की भूमिका और वाराणसी में डोम राजा के घर संतों के भोजन जैसे प्रसंगों को सामाजिक भेदभाव समाप्त करने की दिशा में उनके प्रयासों से जोड़ा गया है |
लेख के अनुसार अशोक सिंघल का कार्यक्षेत्र राम जन्मभूमि आंदोलन के अलावा रामसेतु, अमरनाथ यात्रा, गो-अनुसंधान एवं गोवंश संवर्धन और विभिन्न सामाजिक विषयों पर जनजागरण तक विस्तृत था। होसबाले ने उनके जीवन को “समर्पण, साधना, संगठन और कर्मयोग” का प्रेरणादायी अध्याय बताया।
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था और 17 नवंबर 2015 को उनका निधन हुआ। हाल ही में उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में भी उनके राम जन्मभूमि आंदोलन और सामाजिक कार्यों में योगदान को याद किया गया।











