UP कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: आराधना मिश्रा को प्रदेश की कमान, इमरान मसूद बने कार्यकारी अध्यक्ष

अजय राय की जगह आराधना मिश्रा ‘मोना’ बनीं UPCC अध्यक्ष; देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद वरिष्ठ उपाध्यक्ष, चौधरी वीरेंद्र सिंह को विधायक दल की जिम्मेदारी

लखनऊ/नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह अजय राय की जगह प्रदेश संगठन की कमान संभालेंगी।

इसके साथ ही सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी की ओर से जारी संगठनात्मक नियुक्तियों में देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं।

कांग्रेस ने प्रदेश विधानसभा में भी नेतृत्व परिवर्तन किया है। अब तक कांग्रेस विधायक दल की नेता रहीं आराधना मिश्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद चौधरी वीरेंद्र सिंह को कांग्रेस विधायक दल का नया नेता नियुक्त किया गया है। पार्टी ने निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान की सराहना भी की है।

कौन हैं आराधना मिश्रा?

आराधना मिश्रा ‘मोना’ प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार की विधायक हैं। वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। आराधना इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं और प्रदेश की राजनीति में दो दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं।

रामपुर खास सीट पर उनके परिवार का लंबा राजनीतिक प्रभाव रहा है। प्रमोद तिवारी इस सीट से लगातार नौ बार विधायक रहे थे। उनके राज्यसभा जाने के बाद 2014 के उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने यहां से जीत दर्ज की थी।

इमरान मसूद को अहम जिम्मेदारी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय इमरान मसूद वर्तमान में सहारनपुर से लोकसभा सांसद हैं। कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

इन नियुक्तियों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग मीडिया रिपोर्टें इन नियुक्तियों के सामाजिक और चुनावी निहितार्थों की अलग-अलग व्याख्या कर रही हैं; पार्टी की आधिकारिक घोषणा नियुक्तियों और पदों की पुष्टि करती है।

 

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