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भागलपुर की बेटियां और बेटे राष्ट्रीय स्तर पर एथलीट में परचम लहरा रहे है।

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खेत की पगडंडियां, समाज के ताने कई मुश्किलों को चीरते हुए भागलपुर की दर्जनों बेटियां मेडल के लिए खून पसीना एक कर रही है।

जो इलाका गोलियां की तड़तड़ाहट से गूंजता था वह इलाका अब बेटियों के नन्हें पैरों की थाप से गूंज रहा है। समाज के शिक्षक जितेन्द्र बेटियों व बच्चों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा रहे है।

जी हाँ हम बात कर रहे है बिहार के भागलपुर जिला अंतर्गत नाथनगर के गनौरा बदरपुर इलाके की यह वो इलाका है जहाँ तीन दशक पहले तक गोलियां चलती थी, किसी न किसी का लाश मिलता था, सुनसान इलाका रहने के कारण लोग यहां नहीं जाते थे।

उस इलाके से अब बेटियां और बेटे राष्ट्रीय स्तर पर एथलीट में परचम लहरा रहे है। बच्चों को यहां के पास के ही शिक्षक जितेंद्र मनी संवार रहे हैं।

वर्तमान में इनके पास समाज के निचले तबके के करीबन 100 बच्चे हैं, उन्हें निःशुल्क तैयारी करवा रहे है ताकि मोबाइल फ़ोन और नशे की लत न लगे समाज के मुख्यधारा से बच्चे जुड़े रहे। सबसे खास बात यह कि बच्चे जितनी संख्या लड़कों की है उससे कहीं ज्यादा लड़कियां है जो पगडण्डियों पर अपना भविष्य संवार रहे हैं।

दर्जनों बच्चे बच्चियां जिला स्तर से मेडल हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर तक मेडल ले चुके हैं। नाथनगर की भारती ने लंबी कूद में तीन नेशनल मेडल हासिल की है। स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

सपना कुमारी ने राष्ट्रीय स्तर की लंबी कूद प्रतियोगिता में अब तक दो नेशनल गोल्ड मेडल समेत 40 मेडल जीते चुके हैं, वर्तमान में साई सेंटर सिलीगुड़ी से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

इसके साथ साथ नाथनगर की करिश्मा, करीना, सुनील कुमार, बिरजू तांती समेत कई बच्चे बच्चियों ने जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक परचम लहरा रहे हैं।

टीले के उबड़ खाबड़ पगडण्डियों पर जितेंद्र सर तैयारी करवाते है। जितेंद्र सर शिक्षक हैं स्कूल में छुट्टी के बाद बच्चों को लेकर टीले पर पहुँच जाते है वहां तकरीबन दो घण्टे तैयारी करवाते है।

नेशनल एथलीट ईस्ट जोन में पहला मेडल दे चुके साथ ही कई बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल में हिस्सा ले चुके सुनील बताते है कि यहां सुविधाओं की कमी में बच्चों को निखाड़ रहे हैं, जो बच्चे गरीब है उन्हें भी जितेंद्र सर तैयारी करवाते है कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर तक पदक हासिल कर चुके हैं, जब व्यवस्था नहीं थी तब बच्चों को निखाड़ने का काम किया गया।

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