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संस्कृत साहित्य में महिलाओ का योगदान अतुलनीय है

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संस्कृत साहित्य में महिलाओ का योगदान अतुलनीय है

देववाणी संस्कृत को जाने बिना भारतीय संस्कृति की महत्ता को जाना नहीं जा सकता

लखनऊ: अयोध्या मार्ग, बाबूगंज स्थित रामाधीन सिंह डिग्री कॉलेज में आसरा वेलफेयर फाउंडेशन एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में संस्कृत साहित्य में महिला साहित्यकारों के योगदान विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता वेदाचार्य इंजीनियर कांति कुमार, अखिल भारतीय साहित्य परिषद अवध प्रांत के अध्यक्ष विजय त्रिपाठी, डॉ अमिता खन्ना, प्रज्ञा पटेल एवं प्राचार्या डॉ सुनीता अस्थान उपस्थित रहे।

इंजीनियर कांति कुमार ने कहा कि संसार की समस्त प्राचीनतम भाषाओं में संस्कृत का सर्वोच्च स्थान है। विश्व-साहित्य की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद संस्कृत में ही रची गई है।

संपूर्ण भारतीय संस्कृति, परंपरा और महत्वपूर्ण राज इसमें निहित है देववाणी संस्कृत को जाने बिना भारतीय संस्कृति की महत्ता को जाना नहीं जा सकता।

विजय त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत साहित्य की परम्परा अत्यंत प्राचीन हैं। यह साक्षी हैं कि भारतीय समाज में स्त्रियों का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण रहा हैं। प्राचीन काल से ही भारत में स्त्रियों ने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में अपना अतुल्यनीय योगदान दिया हैं संस्कृत साहित्य की बात करें तो इस क्षेत्र में स्त्रियों ने प्राचीन काल से ही अपना महान सहयोग दिया हैं।

भारत के मध्यकालीन और वर्तमान समाज में स्त्रियों ने संस्कृत साहित्य के लिये महान कार्य किया हैं आज भी वह अनेक कार्यों मे पुरुषों से बहुत ही आगे बढती जा रही हैं।

डॉ अनिता खन्ना ने कहा कि संस्कृत जगत का आधुनिक साहित्य के साथ में आ करके अपना सामर्थ्य पुनः स्थापित किया हैं। आज आधुनिक संस्कृत में स्त्रियों के सर्वागीण विकास को चित्रित किया गया हैं।

स्त्रियों ने प्रबुध्द, प्रगतिशील, वीर, उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर अपने सामर्थ्य शक्ति व बुध्दि से आगे बढती हुई चतुर्दिक विजय-पताका फहरा रही हैं। वही प्रज्ञा पटेल ने सभी वेदों पर विस्तृत जानकारी देते हुए उनके महत्व पर चर्चा किया।

कार्यक्रम में फाउंडेशन अध्यक्ष प्रियंक गुप्ता, दीप्ति मिश्रा, डॉ रेनू सिंह, डॉ नमिता मसंद, डॉ पूनम वर्मा, डॉ प्रियंका शर्मा, डॉ शिवांगी गोयल, प्रशांत सिंह, डॉ अनुराग जायसवाल, लकी पांडेय उपस्थित रहे।

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